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4 जुलाई 2025, जबलपुर के लिए एक भारी दिन रहा। लोगों के ‘20 रुपये वाले डॉक्टर’ पद्मश्री डॉ. मुनीश्वर चंद्र डावर अब इस दुनिया में नहीं रहे। 79 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। (भास्कर)
एक शरणार्थी से लेकर गरीबों के मसीहा तक
डॉ. डावर का जन्म 16 जनवरी 1946 को पाकिस्तान के पंजाब में हुआ था। बंटवारे के बाद उनका परिवार जबलपुर आ गया। यहीं से उन्होंने 1967 में मेडिकल कॉलेज से MBBS किया। 1971 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने सेना में डॉक्टर की सेवा दी। युद्ध के बाद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी को गरीबों का इलाज सस्ता रखने में समर्पित कर दिया।
2 रुपये से शुरू, 20 रुपये पर कायम
- 1972–1986: सिर्फ 2 रुपये में इलाज।
- 1986 के बाद: 3, 5 रुपये होते-होते फीस सिर्फ 20 रुपये तक पहुंची — और वही रही!
सैकड़ों नहीं, लाखों मरीजों ने उनसे इलाज कराया। जिनके पास पैसे नहीं थे, उनके लिए तो वो किसी भगवान से कम नहीं थे।
देश ने भी माना — मिला पद्मश्री सम्मान
गरीबों के लिए इस सेवा के लिए डॉ. डावर को 2023 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। तब उन्होंने कहा था — “मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, देर से सही लेकिन इंसान को फल जरूर मिलता है।”
पूरा शहर गमगीन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा — “यह नुकसान सिर्फ जबलपुर का नहीं, पूरे प्रदेश का है।”
सांसद राकेश सिंह ने उन्हें ‘जबलपुर का गौरव’ कहा और श्रद्धांजलि दी।
उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए — जिनके लिए वो सिर्फ डॉक्टर नहीं, भगवान थे।
आखिर क्यों खास थे डॉ. डावर?
✅ सस्ती दवा — महंगा दिल: महंगाई के इस जमाने में 20 रुपये में इलाज कोई सोच भी नहीं सकता।
✅ इंसानियत की मिसाल: इलाज से ज्यादा वो इंसान की कहानी सुनते थे, दिलासा देते थे।
✅ मकसद पैसे से ऊपर: उनकी जिंदगी ने साबित किया कि असली डॉक्टर वही है जो सेवा को व्यवसाय नहीं, सेवा ही माने।
✨ डॉ. डावर को सलाम
‘20 रुपये वाले डॉक्टर’ हमेशा के लिए चले गए, लेकिन उनके जैसे लोग कभी मरते नहीं — वो लोगों की दुआओं में, कहानियों में और उनकी इंसानियत में हमेशा जिंदा रहते हैं। जबलपुर को हमेशा उनकी कमी खलेगी।