💰 सलाह की कीमत: प्रशांत किशोर की 2 घंटे की एडवाइस के लिए ₹11 करोड़ फीस ने मचाया बवाल
तस्वीर: प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)
राजनीति के गलियारों में हलचल मची हुई है, और चर्चा का केंद्र हैं जाने-माने राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने **प्रशांत किशोर (पीके)**। उन्होंने हाल ही में अपनी पेशेवर कमाई का एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने पूरे देश में हंगामा खड़ा कर दिया है और हाई-लेवल कंसल्टेंसी की कीमत पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
2 घंटे की कंसल्टेशन के लिए चौंकाने वाले ₹11 करोड़
अपनी पार्टी की फंडिंग पर उठ रहे आरोपों का जवाब देने के लिए, प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से अपनी आय का विवरण जारी किया। इसमें सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह है कि उन्होंने एक ही कंपनी को **केवल दो घंटे की सलाहकार सेवा** देने के लिए भारी-भरकम **₹11 करोड़** लिए थे।
पीके द्वारा दिए गए लेनदेन का विवरण:
- **क्लाइंट:** एक कंपनी जिसका नाम **नवयुगा कंस्ट्रक्शंस** बताया गया।
- **सेवा:** एक दो घंटे का कंसल्टेशन सत्र, कथित तौर पर किसी उत्पाद लॉन्च के लिए।
- **चार्ज की गई फीस:** **₹11 करोड़।**
किशोर ने इस उदाहरण का इस्तेमाल अपनी पेशेवर बुद्धि के मूल्य को ज़ोर देकर बताने और उन दावों का खंडन करने के लिए किया कि उनकी पार्टी, **जन सुराज**, अवैध माध्यमों या “शैल कंपनियों” के जरिए फंडेड है।
बड़ी तस्वीर: 3 साल में कमाए ₹241 करोड़
₹11 करोड़ की फीस उनके शानदार करियर की कमाई का सिर्फ एक छोटा हिस्सा है। पीके ने 2021-22 से अपनी कंसल्टेंसी कमाई का विवरण दिया, जिससे एक शीर्ष राजनीतिक और व्यापारिक सलाहकार के वित्त पर एक अभूतपूर्व नज़र मिलती है:
| आय का विवरण | राशि (लगभग) | विवरण |
|---|---|---|
| **कुल कंसल्टेंसी कमाई (3 साल)** | **₹241 करोड़** | विभिन्न कंपनियों और राजनीतिक दलों को सलाह देने से अर्जित। |
| **भुगतान किया गया GST** | **₹30.95 करोड़** | वस्तु एवं सेवा कर के रूप में भुगतान किया गया। |
| **भुगतान किया गया आयकर (Income Tax)** | **₹20 करोड़** | आयकर के रूप में भुगतान किया गया। |
| **जन सुराज पार्टी को दान** | **₹98.75 करोड़** | अपनी व्यक्तिगत, टैक्स-चुकाई गई आय से अपनी राजनीतिक पार्टी को दान किया। |
*”मैं चोर नहीं हूँ। मैंने तीन सालों में वैध कंसल्टेंसी काम से ₹241 करोड़ कमाए हैं। एक-एक रुपया हिसाब में है, और सभी टैक्स विधिवत भरे गए हैं,”* किशोर ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दृढ़ता से कहा।
विवाद का मूल क्या है?
यह वित्तीय खुलासा तब हुआ है जब NDA और अन्य प्रतिद्वंद्वियों ने जन सुराज के फंड की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद राजनीतिक नोक-झोंक बढ़ गई थी।
- बचाव पक्ष: प्रशांत किशोर का सार्वजनिक घोषणा अपने आलोचकों के लिए एक सीधी चुनौती है, जिसका उद्देश्य उनकी वित्तीय सत्यनिष्ठा और उनके राजनीतिक आंदोलन को शक्ति देने वाले धन की वैधता स्थापित करना है। वह भारी भरकम टैक्स भुगतान और अपनी पार्टी को दिए गए पर्याप्त व्यक्तिगत दान को पारदर्शी, कानूनी कमाई के प्रमाण के रूप में उजागर करते हैं।
- आलोचना पक्ष: हालांकि, आलोचक अब सलाहकार काम की प्रकृति पर सवाल उठा रहे हैं। किस तरह की सलाह के लिए दो घंटे की फीस ₹11 करोड़ हो सकती है? उनका तर्क है कि शुल्क का यह विशाल परिमाण अभूतपूर्व है और उनकी गैर-राजनीतिक कंसल्टेंसी के दायरे पर सवाल उठाता है।
भारतीय राजनीति के लिए इसका क्या मतलब है?
प्रशांत किशोर का यह कदम राजनीतिक फंडिंग में अधिक पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अपनी व्यक्तिगत आय और योगदान को सार्वजनिक रूप से सामने रखकर, वह अन्य राजनीतिक हस्तियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण मिसाल कायम करते हैं, जिन्हें अक्सर उनके धन के स्रोतों पर जांच का सामना करना पड़ता है।
जैसे-जैसे वह अपना जमीनी अभियान जारी रख रहे हैं, बहस का केंद्र बदल जाता है: क्या यह कंसल्टेंसी की दुनिया में असाधारण रणनीति की कीमत है, या यह एक अस्पष्ट प्रणाली का लक्षण है? एक बात स्पष्ट है: राजनीतिक रणनीतिकार ने एक बार फिर, न केवल अपनी रणनीति के लिए, बल्कि अपनी सनसनीखेज कमाई के लिए राष्ट्रीय सुर्खियां बटोर ली हैं।
आपकी राय क्या है?
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